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महिलाओं के लिए सबसे अनसेफ है दिल्ली, जयपुर और रांची, मुंबई पर भरोसा अब भी बरकरार; रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे_我的网站

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一 |     对这句话的刻板印象早就该改改了     很多人提起这句话,第一反应就是传统孝道对年轻人的束缚,觉得它是在要求我们守在父母身边,放弃出去闯的机会。    真的是这样吗?我们都只记住了前半句,忘了后半句“游必有方”。    माला दीक्षित, नई दिल्ली। देश की 40 प्रतिशत महिलाएं अपने ही शहर में स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। ये बात महिलाओं की सुरक्षा पर आयी एक ताजा रिपोर्ट से पता चलती है। सभी राज्यों के 31 शहरों में किए गए सर्वे के मुताबिक रांची, श्रीनगर, कोलकाता, दिल्ली, फरीदाबाद, पटना और जयपुर महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर पाए गए जबकि सबसे सुरक्षित शहर कोहिमा, विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटानगर और मुंबई हैं।,ये आंकड़े पीवैल्यू एनालिटिक्स की महिलाओं की सुरक्षा पर आयी ताजा रिपोर्ट नारी (नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इन्डेक्स ऑन वोमेन्स सेफ्टी) में दिए गए हैं। गुरुवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर ने दिल्ली में यह रिपोर्ट जारी की। सर्वे में प्रत्येक राज्य का एक बड़ा शहर शामिल किया गया है जबकि उत्तर प्रदेश के दो शहर लखनऊ और आगरा शामिल किये गए।,सर्वे 18 वर्ष से ज्यादा आयु की 12770 महिलाओं की राय जानी गई। देश भर में महिला सुरक्षा को महिलाओं की निगाह से देखने से पता चलता है कि औसतन 64.6 प्रतिशत महिलाएं अपने शहर में खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं यानी बाकी की 40 प्रतिशत स्वयं को सुरक्षित नहीं महसूस करतीं।,जिन मानकों पर महिला सुरक्षा को आंका गया है उसमें संपूर्ण सुरक्षा, के साथ ही पड़ोस, परिवहन, शिक्षा, कार्यस्थल, स्वास्थ्य, मनोरंजन के स्थान और ऑनलाइन उत्पीड़न शामिल हैं। इसमें ढांचागत संसाधन के अलावा उत्पीड़न की घटनाएं और उनकी शिकायतें भी शामिल हैं।,

7 फीसदी महिलाओं ने उत्पीड़न का सामना किया

  • रिपोर्ट में सार्वजनिक स्थानों में उत्पीड़न को भी रेखांकित किया गया है। इसमें पाया गया है कि 2024 में सात प्रतिशत महिलाओं ने उत्पीड़न का सामना किया जिसमें 18 से 24 वर्ष की महिलाओं में जोखिम सबसे अधिक था। ये सात फीसद का आंकड़ा एनसीआरबी के 2022 के 0.07 फीसद के आंकड़े से काफी ज्यादा है। हालांकि एनसीआरबी के आंकड़े एफआईआर पर आधारित होते हैं जबकि ये रिपोर्ट महिलाओं द्वारा बताई गई घटनाओं पर आधारित हैं। जिसमें अनरिपोर्टेड मामले भी सामने आते हैं।
  • सात प्रतिशत में से सिर्फ 33 फीसद ने रिपोर्ट किया और 16 फीसद में ही कार्रवाई हुई। रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं को रात के समय सुरक्षा चिंताएं ज्यादा होती हैं जिसका कारण पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर जिसमें लाइटिंग, पैट्रोलिंग के अलावा सामाजिक पहलू हैं। सुरक्षा को लेकर शासन तंत्र पर विश्वास को देखा जाए तो सिर्फ 25 प्रतिशत ने प्रभावी कार्रवाई को लेकर भरोसा जताया है जिसका मतलब निकलता है कि चार में से एक महिला को ही उचित कार्रवाई का भरोसा है।

मुंबई की महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं

दिल्ली में असुरक्षा की भावना ज्यादा होने के बारे में पीवैल्यू एनालिटिक्स के प्रोजेक्टर डायरेक्टर सुमित अरोड़ा कहते हैं कि राजधानी में महिलाओं में सुरक्षा को लेकर अपेक्षाएं ज्यादा हैं। उनका कहना है कि राजधानी में रात-दिन महिलाओं का आना-जाना सुरक्षित होना चाहिए। वहीं कोलकाता में पिछले वर्ष अचानक महिलाओं के प्रति अपराधों में हुई बढ़ोत्तरी से भी सुरक्षा की पर प्रतिकूल असर पड़ा है।,जबकि मुंबई की महिलाएं स्वयं को अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं। रहाटकर ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा चिंताओं को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि हर महिला घर, कार्यस्थल, सार्वजनिक स्थान और ऑनलाइन स्वयं को सुरक्षित महसूस करे।,यह भी पढ़ें- 'एंटी रोमियो' की जगह अब लखनऊ में होगी 'महिला सुरक्षा टीम', हर संदिग्ध गतिविधियों पर रहेगी नजर。

二 | 这里的“方”从来不是刻板的方向,而是让父母安心的底气啊。         现在的游,早就不是过去的远游了     放在古代,出一趟远门可能大半年都回不来,音信全无都是常事。父母在家牵肠挂肚,连孩子是死是活都不知道,自然是放心不下。    现在呢?早上从广州出发,晚上就能到北京落地。

三 | 想父母了随时随地能弹个视频通话,连你今天吃了什么火锅都能给父母拍个照片看看。

四 |     现在的远游,早就不会再让父母陷入长久的等待和不安了。    我们这代人,多少人是从小县城考出来,留在大城市工作,别说远游,有些人干脆就在工作的城市安了家。要是真按老刻板印象说,那这些人都不算孝顺吗?当然不是。    真正让父母难过的从来不是你走得远,而是你走了之后,连句准信都不给,连个让他们安心的着落都没有。你说走就走,一年半载不联系,父母在家天天对着空房子掉眼泪,这才是真的不孝。    “游必有方”的新内涵,其实是让我们学会让父母安心     方是什么?放在今天,它不是你必须给父母留一个固定的地址那么简单。    你每个星期固定给父母打个电话,说说你最近的生活,哪怕只是吐槽一下公司的盒饭不好吃,他们都能开心好久。你换工作换住处,第一时间告诉他们新的联系方式,不让他们瞎担心。你在外面攒了积蓄,给自己买了医保社保,让他们知道你就算遇到事也能扛得住。         这些就是现在的“游必有方”啊。    我身边有个朋友,在北京工作了五年,父母一直在老家。她每天不管多晚,都会给妈妈发一条晚安,哪怕只是一个表情。逢年过节一定会回家,实在回不去,也会提前把给父母买的礼物寄回去,还约好邻居家的姐姐多帮着照应。    她父母从来不会天天催她回老家结婚,反而逢人就说我女儿在北京干得好,我们很放心。你看,这不就是对这句话最好的诠释吗?     哪怕你走得再远,你心里装着父母,不让他们悬着一颗心,这就够了。    真正的孝道,从来不是绑着你留在父母身边     现在很多人批判这句话,说它耽误年轻人发展,其实错怪了老祖宗的智慧。    孔子从来没说过不让年轻人出门闯荡,他自己带着弟子周游列国,不也是远游吗?他想说的从来不是“你必须留在父母身边”,而是“你要是出门,一定要想着让父母安心”。         现在很多人的矛盾,从来不是远游不对,而是只想着自己远游,忘了身后的父母。

五 |     有些人出去打拼,几年都不回一次家,电话也不打几个,父母问起近况就嫌烦,说他们不懂自己的理想。可你的理想再大,也不该让生你养你的人,天天对着月亮盼你回信啊。    也有些人,明明自己想去外面闯,就因为这句话,硬生生留在小地方,天天抱怨自己被家庭耽误了,对着父母甩脸子。这也不是孝道,这是扭曲了这句话本来的意思。    父母在,也能远游,只要你带着心安回家     现在交通这么方便,通讯这么发达,距离早就不是什么问题了。    你在大城市打拼,每年抽两次假期带父母出去旅游,或者接父母过来住一段时间,让他们看看你生活的地方,知道你过得好不好,比你天天守在家里跟他们吵架强多了。    你哪怕一个月回一次家,每次回去都开开心心陪他们吃顿饭,聊聊天,比你天天住在一起,却对着手机不理他们强多了。

六 |          这句话放到今天,从来不是束缚年轻人的枷锁,而是提醒我们的一句箴言。不管我们走得有多远,飞的有多高,都别忘了身后还有牵挂我们的人。

七 |     别让你的远游,变成父母望眼欲穿的等待。

八 | 别把你的任性,当成追求自由的借口。    父母在,人生尚有来处。只要你让父母知道你的归处,远游又有什么关系呢?     这份刻在骨子里的牵挂,才是这句话留到今天,最珍贵的新内涵。返回,查看更多。

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Published on:22:12:13